dil-ke-kiraydaar-hindi-kavita
§ 💔 दर्द / Sad1,100 reads

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adhuri-mohabbat-part-2 कितनी मासूम थी वो, मुस्कान से क़त्ल कर दी थी, पलके झुका के, पल भर में अपना बना ली थी। वो जो बातों बातों में, कोई बात नहीं कह जाती थी, उनकी यही तकीया कलाम, हर बात याद दिला जाती थी। रुमाल जिस पे रख दिया, वो सीट उनका हो गया, उसने नज़र मुझ पर रख दी, मैं भी उनका हो गया। अदब थी उनकी अल्फ़ाज़ में, अपना सा वो लगती थी, सादगी से मुस्कुराकर, जब वो हाल मेरा पूछती थी। हया थी उनकी आँखों में, कसक थी उनकी बातों में, कैसे न बिखरते हम, कसिस थी उनकी ज़ुल्फ़ों में। आप से तुम पे जब आती वो, अपनापन का एहसास होता, उनके ग़ुस्से में जो सवाल होता, उसी में मेरे लिए जवाब होता। ग़ज़ब का किरदार निभाया हम दोनों ने अपनी-अपनी अल्फ़ाज़ों को, कितना छुपाया हम दोनों ने, ख़ामोशी ने ही तहलका मज़ा दिया, शब्द से ज़्यादा बयान कर दिया आँखों ने। इशारों में वो बात करती, इश्क़ का वो जज़्बात रखती, अल्हड़ सी थी उनकी हरकतें, रोमांचक कर देती उनकी बातें। दिल के किराएदार से दिल लगा बैठा, ये नादानी में हमने कैसा रोग लगा बैठा, किराएदार कभी अपना घर समझते नहीं, किस परदेसी से हमने दिल लगा बैठा। अब अलविदा कहने का समय आ गया, अरमानों का गला घोटने का समय आ गया, कितने जज़्बात और अल्फ़ाज़ अंदर रह गए, यही सोचकर आँसू बाहर आ गए। सोचकर ही सहम जाता हूँ, खोने से उनको डर जाता हूँ, क्या हाल होगा उस दिन, मुलाक़ात आख़िरी होगी जिस दिन। झूठा ही सही, दिलासा तो था उनका, मालूम था कभी मिलेगी नहीं, पर फिर भी आशा तो था उनका। उम्मीद की मोमबत्ती जल रही थी, ज़िन्दगी में नूर फैल रही थी, मुद्दत हो गई थी मोमबत्ती जले हुए, अब वो भी लड़खड़ाकर बुझ रही थी। मुस्कुराकर जब वो रुख़सत होगी, फ़र्ज़ हम भी अपना निभा देंगे, हंसी झूठी ही सही, हँसकर उनको अलविदा कह देंगे। यह एक Poetry Series है, इसके बाकी पार्ट भी पढ़ें: by Raju Raj

— shayariprime.com

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