
savera-na-hone-wali-neend-mother-poetry
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एहसास सिर्फ़ एहसास तक ही रह जाते हैं, लबों पर आकर शब्द नहीं बनते। हम छिपा लेते हैं अपनी हर ख़्वाहिशों को, किसी के लिए दीवार नहीं बनते। तेरी हर ख़ुशी, हर तमन्ना को ज़िंदगी के धागे में पिरोते गए। जब वह माला बन गई, तब तुम उसे पहनकर चले गए। हम अपनी आँखों में तेरी कामयाबी के ख़्वाब आँसुओं से सींचते गए। अब इन आँखों में दर्द और तेरे इंतज़ार के सिवा कुछ भी नहीं रह गया। बचपन में जब तुम्हें नींद नहीं आती थी, तो मेरी ममता के आँचल में सोकर लोरी सुनते थे। अब जब मुझे नींद नहीं आती है, पल भर पास बैठने को कहती हूँ, तो काम है कहकर चले जाते हो। जिसके सानिध्य में बड़े हुए, उसी से छुटकारा चाहते हो। तेरी आँखों में बेचैनी और बेबसी देखकर लगता है कि तुम्हें भी मेरी नींद न आने की चिंता सताती है। पर वह ऐसी नींद, जिसके बाद कोई सवेरा न हो। by Raju Raj
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