
hijr-ka-dard-sachcha-pyar-hindi-poetry
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हिज्र का दर्द भी तुम समझ जाओगी, शाम ढलते ही वापस तुम लौट आओगी। जवानी में दौलत की हवस लाज़िमी है, मगर, क्या बुढ़ापा भी तन्हाई में काट पाओगी? जब शब्द गले में ही अटकने लगेंगे, तब hamara एहसास का साथ ही साथ निभाएगा। तब तुम्हें समझ आएगा कि प्यार ही सबसे बड़ी दौलत है। जवानी का मंज़र हमेशा साथ नहीं रहता, पतझड़ आते ही परिंदे भी पेड़ों से उड़ जाते हैं। मगर जो सच्चा साथी हो, वह पतझड़ में भी साथ निभाता है। By Raju Raj
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