prem-ibadat-mohabbat-junoon-hindi-shayari
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तुम्हारे जज़्बात इतने कम हैं, कि शायद शब्दों में उतर जाएँ, पर मेरा... अगर नदी को भी स्याही बना दूँ, तो लिखने में वो भी कम पड़ जाए। तेरी तो रातों की नींद उड़ी है, ज़रा आकर यहाँ भी देखो। मेरे लिए तो दिन और रात का फ़र्क़ ही मिट चुका है। तेरी मोहब्बत, मोहब्बत नहीं, जुनून था, जिसमें सिर्फ़ जिस्म को पाने की ज़िद थी। मेरा प्रेम तो इबादत था। मैं कैसे हार मानकर, तेरी तरह, कुछ शब्दों में ही अपनी मोहब्बत को समेट लूँ? मुझे यक़ीन है, हम फिर कहीं मिलेंगे, ऐसी दुनिया में, जहाँ मज़हब, अमीरी, ग़रीबी, मोहब्बत की आड़ में नहीं आएँगे, और हम दोनों एक हो जाएँगे।

— shayariprime.com

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