yaadon-ka-ghar-kavita
§ 💔 दर्द / Sad100 reads

yaadon-ka-ghar-kavita

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घर तो यादों का घर था, जब यादें ही मिट गई, तो अब वो घर कहाँ? महज़ मिट्टी की एक दीवार रह गया। बचपन से बाँधकर जो रखी थी यादें, कहानी की तरह जो सुनाते थे यादें, वो यादें महज़, यादें ही रह गई। जो अपनों की थी कुछ नाज़ुक यादें, अपनों ने ही मिट्टी में मिला दी, वो नाज़ुक यादें। जिसे सोने सा दिल में सजाकर रखा था, कच्ची उम्र की थी कुछ नाज़ुक यादें, ढलती शाम में सिमट गई वो यादें, तन्हाई में तन्हा कर गईं वो यादें। घुटन सी होती है अब उस घर में, जिसमें सुकून कभी मिलती था, चमक-धमक की दीवारों में, धुंधली सी हो गई मेरी यादें। इससे तो बेहतर यही था, कि मैं ही एक याद बनकर रह जाता, इससे पहले कि मिटती मेरी यादें।🏡🍂💔🌙

— shayariprime.com

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